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पाकिस्तान मुंह दिखाने लायक नहीं रहा...ट्रेन हाईजैक में 154 सैनिक अब भी BLA के कब्जे में, भारत से सैन्य ताकत में कितना पीछे पड़ोसी?

पाकिस्तान में ट्रेन हाईजैक मामले में अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। पाकिस्तानी फौज जहां ऑपरेशन खत्म होने के दावे कर रही है तो वहीं जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को हाईजैक करने वाली बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने दावा किया है कि उसके कब्जे में अभी पाकिस्तानी फौज के 154 जवान हैं। पाकिस्तान की सियासत हमेशा से भारत विरोधी रही है। ऐसे में वह ट्रेन हाईजैक मामले में भी भारत पर आरोप लगा रहा है। हकीकत यह है कि पाकिस्तान की आतंक को बढ़ावा देने के नतीजे अब दुनिया के सामने आ रहे हैं। उसके घर में ही अब विद्रोह सिर उठाने लगा है। बलूचों पर अत्याचार ने उसकी पोल दुनिया के सामने खोलकर रख दी है।

पाकिस्तानी फौज ने क्या किया था दावा
आईएसपीआर के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ ने एक टीवी चैनल से बातचीत में यह दावा किया कि इस ऑपरेशन के दौरान किसी यात्री की मौत नहीं हुई है।हालांकि, प्रवक्ता ने बताया है कि ऑपरेशन शुरू होने से पहले ही विद्रोहियों ने 21 लोगों की हत्या कर दी थी। वहीं, पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्री अत्ता तरार ने बताया है कि ट्रेन में कुल 440 यात्री सवार थे, जिनमें से कई को बंधक बना लिया गया था। इन्हें बचाने का अभियान 36 घंटों तक चला। उन्होने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना ने सावधानी और कुशलता से ऑपरेशन को अंजाम दिया, जिससे ऑपरेशन के दौरान किसी बंधक को कोई नुकसान नहीं हुआ।

कब बना था यह संगठन, किसने लगाई है पाबंदी
BLA संगठन 2000 के दशक की शुरुआत में बना था। इसका मकसद बलूचिस्तान को आजाद कराना है। पाकिस्तान ने 2006 में इस पर प्रतिबंध लगा दिया। अमेरिका ने 2019 में इसे वैश्विक आतंकी संगठन घोषित किया। अमेरिकी विदेश विभाग ने इसे 'एक सशस्त्र समूह बताया जो सुरक्षा बलों और नागरिकों को निशाना बनाता है, खासकर पाकिस्तान के बलूच इलाकों में।'
क्या 200 से ज्यादा ताबूत लाए गए हैं क्वेटा में
एक मानवाधिकार कार्यकर्ता ने क्वेटा रेलवे स्टेशन पर 200 से अधिक ताबूत लाए जाने का दावा किया है, जिससे संकेत मिलता है कि पूरी कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में लोग मारे गए हैं। कई पाकिस्तानी मीडिया के इंटरनेट मीडिया हैंडल पर ट्रेन में यात्रा करने वाले करीब 200 सुरक्षाबलों के जवानों की सूची जारी की गई थी, जिसके चलते ही हाईजैकिंग की आशंका जताई गई। मानवाधिकार कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने एक बयान में बताया कि क्वेटा रेलवे स्टेशन पर 200 से ज्यादा ताबूत लाए गए हैं।

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