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राजस्थान के 4 IAS अफसरों की लग गई क्लास! जयपुर, जोधपुर, अजमेर और बीकानेर के कलेक्टर से CS ने कहा - ऐसे काम नहीं चलेगा

जयपुर: राजस्थान के मुख्य सचिव सुधांश पंत फ्री हैंड होकर काम कर रहे हैं। उनके कामकाज में सरकार का कोई दखल नहीं होता। यही वजह है कि वे अपने अधीनस्थ अफसरों से भरपूर काम कराते हैं। अगर कोई अधिकारी काम करने में आनाकानी करते हैं तो वे फटकार लगाने में जरा भी देर नहीं लगाते। गुरुवार 20 मार्च को मुख्य सचिव ने सभी जिला कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की। इस बैठक में उन्होंने कई कलेक्टरों को फटकार लगा दी। उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि परफॉर्मेंस सुधारनी होगी, ऐसे काम नहीं चलेगा।

जयपुर जिला कलेक्ट्रेट सभागार से चीफ सेक्रेटरी सभी जिला कलेक्टरों से वीसी के जरिए जुड़े थे। उन्होंने जिला स्तरीय जनसुनवाई में खराब परफॉर्मेंस पर कई जिला कलेक्टरों से नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि शिकायतों और समस्याओं के निराकरण के आंकड़े देखकर लगता है कि जिला स्तरीय जनसुनवाई केवल खानापूर्ति बनकर रह गई है। यहां लोगों की शिकायतें तो सुनी जाती है लेकिन उनके निस्तारण में गंभीरता नहीं दिखाई जाती। जब समाधान ही नहीं हो रहा तो शिकायत सुनने का क्या अर्थ रह गया। चीफ सेक्रेटरी ने कहा कि कई जिलों में संतुष्टि दर 30 प्रतिशत से भी कम है। इससे लगता है कि सभी कलेक्टरों ने जनसुनवाई को गिव अप कर दिया है।

खराब परफॉर्मेंस के चलते मुख्य सचिव सुधांश पंत ने चार जिला कलेक्टरों से जवाब भी मांगा। जयपुर, जोधपुर, अजमेर और बीकानेर जिला कलेक्टरों से कहा कि आपके जिले में शिकायतों का निस्तारण इतना कम क्यों है। पंत ने पहले ही कह दिया कि कोई यह बहाना मत बनाना कि उनके जिले बड़े हैं। जिले बड़े हैं तभी तो सीनियर अफसरों को अहम जिम्मेदारी दी गई है। अगर बड़े जिलों में परफॉर्मेंस खराब रहेगी तो सीनियर अफसरों को जिम्मेदारी देने का क्या मतलब रह जाएगा। छोटे जिलों और बड़े जिलों में कुछ फर्क होगा, तभी वरिष्ठ अफसरों को जिले की जिम्मेदारी सौंपी जाती है।

चीफ सेक्रेटरी की नाराजगी पर जयपुर जिला कलेक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने कहा कि ग्राम और उपखंड स्तर पर अधिकतर शिकायतों का समाधान कर दिया जाता है, लेकिन कुछ ऐसे प्रकरण होते हैं जो विवाद की स्थिति में कोर्ट में लंबित होते हैं। फरियादियों को बता दिया जाता है कि इस मामले में कोर्ट से ही रिलीफ मिलेगी लेकिन वे शिकायत देकर जाते हैं। डॉ. सोनी ने कहा कि कई मामलों में शिकायतों का निस्तारण होने के बाद भी परियादी संतुष्ट नहीं होता है। यही वजह है कि सेटिस्फेक्शन रेट कम है।

वीसी के दौरान मुख्य सचिव ने साफ कहा कि शिकायतों का निस्तारण करने में शॉर्टकट नहीं अपनाएं। अधिकतर मामलों में देखा जाता है कि शिकायत मिलने के बाद उसे संबंधित विभाग को फोरवर्ड करने के बाद शिकायत को डिस्पोजल में डाल दिया जाता है। केवल संबंधित विभाग को चिट्ठी लिख देने से शिकायत का समाधान नहीं होता है। पंत ने कहा कि परिवादी को पीड़ा लेकर आता है, उसका समाधान होना जरूरी है। जब तक परिवादी को रिलीफ नहीं मिलेगी तब तक जनसुनवाई का कोई अर्थ ही नहीं रह जाता।




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