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भारत को 'ना', चीन को 'हां'... मालदीव ने मोदी सरकार को दिया बहुत बड़ा झटका, नौसेना की बढ़ी टेंशन


माले: मालदीव ने भारत को बड़ा झटका देते हुए चीन से बड़ा समझौता किया है। इस समझौते के तहत चीन को मालदीव के जलक्षेत्र में खुफिया जानकारी एकत्र करने की मंजूरी मिली है। यह समझौता मालदीव के पर्यावरण संरक्षण एजेंसी और चीन के दक्षिण चीन सागर समुद्र विज्ञान संस्थान के बीच हुआ है। चीन और मालदीव के बीच हुए इस समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की टेंशन बढ़ सकती है, खासकर लक्षद्वीप में स्थित भारतीय मिलिट्री बेस के लिए। मालदीव ने ऐसा ही समझौता भारत के साथ भी किया था, लेकिन 2023 में राष्ट्रपति बनते ही मोहम्मद मुइज्जू ने इसे रद्द कर दिया था। तब उन्होंने ठीक ऐसे ही समझौते को लेकर लंबा-चौड़ा ज्ञान भी दिया था, जो शायद अब वह भूल चुके हैं।

भारत को 'ना', चीन को 'हां'... मालदीव ने मोदी सरकार को दिया बहुत बड़ा झटका, नौसेना की बढ़ी टेंशन
मालदीव ने चीन के साथ अपनी समुद्री सीमा में जासूसी करने के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। ऐसे में अब चीन को मालदीव के जल क्षेत्र में हवा, सतह और पानी के नीचे जानकारियां जुटाने और जासूसी करने का अधिकार मिल गया है। मालदीव ने कुछ ऐसा ही समझौता भारत के साथ किया था, जिसे मुइज्जू सरकार ने रद्द कर दिया था।

मालदीव में रडार उपकरण लगा रहा चीन

अधाधु से बात करते हुए मामले की संवेदनशीलता के कारण नाम न बताने की शर्त पर समझौते से परिचित एक व्यक्ति ने कहा, "इस समझौते के तहत, चीन समुद्र में उपकरण लगा रहा है। ये उपकरण बहुत सारी जानकारी एकत्र कर सकते हैं। बदले में, वे मालदीव सरकार के लिए कुछ प्रशिक्षण आयोजित करेंगे।" सोमवार को, मालदीव सरकार ने घोषणा की कि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस पर पर्यटन और पर्यावरण मंत्री थोरिक इब्राहिम ने हस्ताक्षर किए। लेकिन कोई और विवरण नहीं दिया गया।

युद्धपोतों और पनडुब्बियों की जासूसी करेगा चीन

तीनों स्रोतों ने अधाधु को बताया कि दक्षिण चीन सागर समुद्र विज्ञान संस्थान के साथ समझौते से चीन को हवा, समुद्री धारा, ध्वनि, लवणता और तापमान मापने की अनुमति मिलती है। ये उपकरण समुद्र तल और समुद्र की सतह पर लगाए जाएंगे। इस समझौते के तहत सबसे चिंताजनक बात सोनार संकेतों को रिकॉर्ड करने और उनकी निगरानी करने की संभावना है। यह समझौता चीन को जीवित और निर्जीव चीजों की आवाज़ों का निरीक्षण और निगरानी करने की अनुमति देता है। ये उपकरण समुद्र की सतह पर जहाजों और समुद्र के नीचे पनडुब्बियों का पता लगा सकते हैं। यह विमान और उसकी ऊंचाई का भी पता लगा सकता है।

डेटा को लेकर भी दोनों देशों ने किया समझौता

इस समझौते के तहत प्राप्त कोई भी डेटा मालदीव और चीन के बीच आपसी समझौते से ही किसी तीसरे पक्ष को हस्तांतरित किया जा सकता है। इसका मतलब है कि इस समझौते के तहत मालदीव द्वारा एकत्र की गई जानकारी चीन की सहमति के बिना तीसरे पक्ष को नहीं दी जा सकती। साउथ चाइना सी इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोलॉजी चीन के सबसे बड़े समुद्री शोध संस्थानों में से एक है और इसने शोध जहाजों को डिजाइन और निर्मित किया है।

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