सैकड़ों लोगों एंजियोग्राफी एवं एंजियोप्लास्टी करने वाले डॉ. महला खामोशी से दुनिया को अलविदा कह गए। सीकर हाल जयपुर निवासी डॉ. महला जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी विभाग में विभागाध्यक्ष थे।
अजमेर। ‘वो जो बेचते थे दवा-ए-दिल, वो दुकान अपनी बढ़ा गए….’। बहादुर शाह जफर की एक गजल का यह शेर जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश महला के असामयिक निधन की घटना पर सटीक बैठता है।
सैकड़ों लोगों एंजियोग्राफी एवं एंजियोप्लास्टी करने वाले डॉ. महला खामोशी से दुनिया को अलविदा कह गए। सीकर हाल जयपुर निवासी डॉ. महला जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी विभाग में विभागाध्यक्ष थे।
रोजाना अस्पताल में हार्ट रोग के मरीजों की खुद एजियोग्राफी व एंजियोप्लास्टी करते थे। उनके उपचार और परामर्श से सैकड़ों मरीज स्वस्थ हुए और ऑपरेशन के बाद सामान्य हैं।
