12 साल के मासूम की दुनिया तब बिखर गई जब पिता का साया उसके सिर से उठ गया। मासूम की जिन्दगी से बारी-बारी सब बिछड़ते चले गए। मां ने रिश्तेदारों के भरोसे छोड़कर दूसरा आशियाना बसा लिया। रिश्तेदारों से अपनापन नहीं मिला तो मासूम बालक घर छोड़कर मां की तलाश में निकल पड़ा। वह दो दिन से अजमेर की गलियों में मां की तलाश में भटकता रहा। आखिर 17 जून को कोतवाली थाना पुलिस ने दस्तयाब किया तो जिला बाल कल्याण समिति के समक्ष उसकी दर्द भरी दास्तां बाहर आ गई।
बुधवार को चाइल्ड लाइन संस्था के समन्वयक प्रेमनारायण शर्मा व टीम ने 12 वर्षीय बालक को जिला बाल कल्याण समिति अध्यक्ष अंजली शर्मा, सदस्य राजलक्ष्मी किराररिया , तबस्सुम बानो, अरविन्द कुमार मीणा के समक्ष पेश किया। समिति ने जब बालक की काउंसलिंग की तो बालक का दिल का दर्द आंखों से अश्रुधारा में बह निकला।
समिति सदस्य के समक्ष बालक ने बताया कि वह अपनी मां की तलाश में अजमेर में आया है। उसकी मां ने कुछ माह पहले अजमेर में दूसरा विवाह किया था। विवाह के समय उसने उससे वादा किया था कि वह उसे डेढ़ दो माह बाद बुला लेगी। वह इंतजार करता रहा लेकिन ना कॉल आया ना उसकी मां आई। उसकी मां ने उसको मौसी व मामा के भरोसे छोड़ा था लेकिन उन्होंने उसे अपनाने के बजाए प्रताड़ित करने लगे। उसे उसकी मां का पता भी नहीं दिया गया। आखिर वह मां की तलाश में अजमेर चला आया।
पहले पिता का उठा साया
पड़ताल में मासूम ने बताया कि वह 6 साल का था तब पिता की अकाल मृत्यु हो गई। मां जयपुर में नानी व मामा के पास आ गई लेकिन कुछ समय बाद नानी की मृत्यु हो गई। मां व मामा उसे लेकर गुजरात पालनपुर उसकी मौसी के पास आ गए। जहां कुछ समय बाद उसकी मां ने अजमेर के किसी अन्य व्यक्ति से शादी रचा ली। मां ने उसे अपनी छोटी बहन(मौसी) के पास छोड़ते हुए विश्वास दिलाया कि वह उसे अपने पास बुला लेगी लेकिन वक्त गुजरता चला गया लेकिन उसकी मां ने उसको नहीं बुलाया।इनका कहना है…
बालक की काउंसलिंग में उसकी पीड़ा सामने आई है। रिश्तेदारों से प्यार, दुलार नहीं मिलने से बालक अपनी मां की तलाश में अजमेर आया है। रिश्तेदारों से सम्पर्क हो चुका है लेकिन बालक को उसकी मां को ही सुपुर्द किया जाएगा ।

