Reporting:- by = Aryan Sharma
जगह की कमी के चलते किया निर्णय, लागत ज्यादा
जारवाल ने बताया- सरकार ने अजमेर के हाथीभाटा में 132 केवी जीएसएस बनाने की घोषणा की। यहां पर जगह की कमी है और ऐसे में यहां 132 केवी जीआईएसएस ( गैस इंसुलेटेड सब स्टेशन) बनाने की प्लानिंग की गई है।
जीएसएस के लिए करीब ढाई हैक्टेयर जमीन की जरूरत पड़ती है। इतनी जमीन यहां पर उपलब्ध नहीं है। इसके लिए जीआईएसएस बनाने की योजना तैयार की। इसके लिए केवल 0.25 हैक्टेयर जमीन की जरूरत ही होती है।
साधारण जीएसएस में ब्रेकर, करंट ट्रांसफॉर्मर, प्रोटेंशियल ट्रांसफॉर्मर होता है। जो अलग अलग होते है। लेकिन जीआईएसएस में गैस चैम्बर बनता है। इसमें ब्रेकर, करंट ट्रांसफॉर्मर, प्रोटेंशियल ट्रांसफॉर्मर का कॉम्पैक्ट होता है।
साधारण जीएसएस का खर्चा करीब पच्चीस करोड़ होता है लेकिन इसमें करीब 90 से 100 करोड़ रुपए खर्च होंगे। साधारण जीएसएस की वैलिडिटी की तरह इसकी वैलिडिटी 50 साल है।
ऐसा होता है गैस इंसुलेटेड सब स्टेशन-फाइल इमेजसात किलोमीटर अंडर केबल बिछेगी
जारवाल ने बताया कि हाथीभाटा के इस गैस इंसुलेटेड सब स्टेशन के लिए अंडर केबल बिछाई जाएगी। घूघरा व मदार के बीच बने ग्रिड सब स्टेशन से हाथीभाटा तक सात किलोमीटर यह लाइन होगी।
सुचारू होगी बिजली आपूर्ति, मिलेंगे नए कनेक्शन
जारवाल ने बताया कि इसके निर्माण से बिजली आपूर्ति की व्यवस्था सुचारू होगी और नए कनेक्शन भी जारी किए जा सकेंगे। इसके बनने से लोड पर्याप्त मिल सकेगा। फाल्ट भी कम होंगे।
अत्याधुनिक होता है जीएसएस, मेंटीनेंस मुक्त
जीआईएस तकनीक आधारित ग्रिड सबस्टेशन में सल्फर हैक्साक्लोराइड (एसएफ-6) गैस का उपयोग होता है। इसी में इसे इंसुलेट किया जाता है। पावर ट्रांसफॉर्मर आउटडोर होता है। सभी उपकरण इनडोर एक मेटल बॉक्स में बंद रहते है। फेस में औसत प्रेशर के लिए गैस बेहतर होती है। सर्किट, ब्रेकर, बस बार, आइसोलेटर, लोक ब्रेक स्वीचेस, वोल्टेज ट्रांसफॉर्मर, अर्थिंग स्विचेस को मेटल हाउस में बंद कर सल्फर हैक्साक्लोराइड भरी दी जाती है। यह पूरी तरह से मेंटीनेंस मुक्त है।

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