UP News: योगी आदित्यनाथ ने औरंगजेब और सैय्यद सालार मसूद गाज़ी का नाम लिए बगैर कहा कि जब भारत की संस्कृति और परम्परा का गुणगान दुनिया कर रही है, तब किसी आक्रांता का महिमामंडन नहीं होना चाहिए। आक्रांता की महिमामंडन का मतलब देशद्रोह की नींव को पुख्ता करना।
अजीम मिर्जा, बहराइच: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi
Adityanath) ने औरंगजेब (Aurangzeb) और सैय्यद सालार मसूद गाज़ी का नाम लिए
बगैर कहा कि जब भारत की संस्कृति और परम्परा का गुणगान दुनिया कर रही है,
तब किसी आक्रांता का महिमामंडन नहीं होना चाहिए। आक्रांता की महिमामंडन का
मतलब देशद्रोह की नींव को पुख्ता करना। राजनीतिक-सामाजिक विश्लेषकों ने
मेले पर प्रतिबंध को नब्ज टटोलने से जोड़कर देखा है।
सीएम योगी
आदित्यनाथ ने मिहीपुरवा तहसील के लोकार्पण के अवसर पर अपने भाषण की शुरूआत
करते हुए कहा कि बहराइच जनपद देश की ऋषि परम्परा से जुड़ा हुआ जनपद है। कहते
हैं कि महर्षि बालार्क का एक विश्व प्रसिद्ध आश्रम इसी जनपद में था तथा
बहराइच वही ऐतिहासिक भूमि है, जहाँ एक विदेशी आक्रांता को धूल धूसरित करते
हुए महाराजा सुहेलदेव ने विश्व पताका लहराई थी।" इस भाषण में उन्होंने एक
बार भी सैय्यद सालार मसूद गाज़ी का नाम नहीं लिया लेकिन उनका इशारा उसी तरफ
था।
CM ने कुछ समय विकास और महाकुम्भ के भव्य आयोजन की बात करने के
बाद फिर कहा कि "स्वतंत्र भारत ऐसे किसी देश द्रोही को स्वीकार नहीं कर
सकता है जो भारत के महापुरुषों को अपमानित करता हो। उन आक्रांताओं का महिमा
मंडन करता हो जिन्होंने भारत की सनातन संस्कृति को रौंदने का का काम किया
था। हमारी आस्था पर प्रहार किया था उसे आज का नया भारत स्वीकार करने को
कत्तई तैयार नहीं है।"
मुख्यमंत्री के बयान की वर्तमान परिस्थितियों
में क्या मायने हैं, इस पर वरिष्ठ पत्रकार सतीश कुमार श्रीवास्तव ने कहा
कि "मुख्यमंत्री के बयान से ऐसा लगता है कि बहराइच की दरगाह में लगने वाले
मेले पर भी ग्रहण लग सकता है। चूंकि सैय्यद सालार मसूद गाज़ी से संबंधित
नेजा मेला को अनुमति न देकर शासन-प्रशासन ने यह दर्शा दिया है कि हम सैय्यद
सालार मसूद गाजी का महिमा मण्डन नहीं होने देंगे।"
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