जोधपुर में आईपीएस हेमंत कलाल और उनकी टीम ने जोधपुर सेंट्रल जेल का औचक निरीक्षण करने का प्रयास किया, लेकिन जेल प्रशासन ने प्रवेश की अनुमति नहीं दी। इसके बाद 22 दिन बाद फिर से निरीक्षण किया गया जिसमें दो मोबाइल बरामद हुए। गृह विभाग के आदेशों के बावजूद पहली बार निरीक्षण से रोका जाना संदिग्ध है।
जोधपुर: प्रदेश की अलग अलग जेलों में बंद कैदी जेल में होकर भी अपने गिरोह का संचालन करते हैं। अक्सर यह बात सामने आ चुकी है। जेल में ही बड़े अपराधों की प्लानिंग होती है और वहीं से गुर्गों को आदेश दिया जाता है जिसके बाद बड़ी वारदातों को अंजाम दिया जाता है।हैरान करने वाली यह बात भी बीते दिनों सामने आई थी जब जेल से राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को जान से मारने की धमकी दी गई। एक बार नहीं, बल्कि तीन से चार बार ऐसी घटनाएं हो चुकी है। इसी क्रम में जोधपुर कमिश्नरेट में प्रशिक्षु आईपीएस हेमंत कलाल ने बड़ा खुलासा किया है। कलाल का कहना है कि वे अपनी पुलिस टीम और एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को साथ लेकर जोधपुर सेंट्रल जेल का औचक निरीक्षण करने पहुंचे लेकिन जेल के गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने जेल में एंट्री नहीं करने दी।
टीम बिना निरिक्षण को लौटना पड़ा
आईपीएस हेमंत कलाल का कहना है कि उनके साथ एडिशनल डीसीपी और तहसीलदार सहित पुलिसकर्मियों की एक पूरी टीम थी। औचक निरीक्षण की कार्रवाई को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया। जेल के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों का तर्क था कि जेल एसपी नहीं है, ऐसे में जेल में एंट्री नहीं दे सकते। इस दौरान करीब 20 मिनट तक जेल प्रशासन के अधिकारियों के जवाब का इंतजार किया गया। जेल के मुख्य द्वार पर जेल इंस्पेक्टर मौजूद थे लेकिन 20 मिनट तक हमारी टीम को खड़ा रखा गया। आखिर में आईपीएस सहित अन्य सभी को बिना निरीक्षण किए ही वापस लौटना पड़ा।
ऐसा क्यों हुआ, यह जानकर मैं हैरान हूं - IPS हेमंत कलाल
आईपीएस हेमंत कलाल बताते हैं कि वे यह जानकर हैरान हैं कि आखिर ऐसा क्यों हुआ। एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के साथ होने के बावजूद भी जेल का औचक निरीक्षण नहीं करने दिया गया। उन्होंने कहा कि 20 मिनट तक इंतजार करना कोई मामूली बात नहीं है। इतने समय में कोई भी कैदी प्रतिबंधित सामान को आसानी से छिपा सकता है, उसे खुर्द-बुर्द कर सकता है। इतनी देर बाद अगर जेल में प्रवेश करने की अनुमति मिल भी जाती तो निरीक्षण का कोई औचित्य नहीं रह जाता। आईपीएस कलाल का कहना है कि उन्होंने पुलिस कमिश्नर जोधपुर सहित अन्य उच्च अधिकारियों को शिकायत दर्ज कराई है।
गृह विभाग का आदेश है रात्रिकालीन चेकिंग का
आईपीएस हेमंत कलाल का कहना है कि जेल से बार
बार धमकियां दिए जाने की घटनाएं सामने आती रही है। इसी को मद्देनजर रखते हुए हाल ही में गृह विभाग ने आदेश जारी किया था कि रात्रि के समय जेलों का औचक निरीक्षण किया जाए ताकि प्रतिबंधित या संदिग्ध सामान की जब्ती हो सके। इसी आदेश की अनुपालना में 30 जनवरी को उनके नेतृत्व में पुलिस टीम जोधपुर सेंट्रल जेल पहुंची थी लेकिन मुख्य गेट पर काफी देर तक खड़ा रहने के बावजूद दरवाजा नहीं खोला गया। आईपीएस कलाल का कहना है कि औचक निरीक्षण से रोकना उचित नहीं है। गृह विभाग के आदेश में स्पष्ट है कि सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद औचक निरीक्षण होगा तो वास्तविक स्थिति का पता चल सकता है। इसलिए औचक निरीक्षण करने गए लेकिन एंट्री नहीं मिलने की वजह से वापस लौटना पड़ा।
22 दिन बाद फिर गए तो मोबाइल मिले
एक बार बैरंग लौटने के बाद पुलिस टीम 21 फरवरी की रात को फिर से जोधपुर सेंट्रल जेल पहुंची। उस दिन जेल प्रशासन ने औचक निरीक्षण के लिए अनुमति दी। आईपीएस हेमंत कलाल बताते हैं कि तलाशी के दौरान वार्ड नंबर 6 के बैरक संख्या 2 में दो मोबाइल छिपाए हुए मिले थे। अधिकारियों की टीम को भ्रमित करने के लिए वार्ड में एक मटकी रखी हुई थी। मटकी के अंदर एक और मटकी रखी हुई थी। अंदर रखी हुई मटकी को उल्टा करके देखा तो उसमें दो मोबाइल छिपाए हुए थे जिन्हें जब्त किया गया। आईपीएस का कहना है कि 30 जनवरी की रात को निरीक्षण से रोकना उचित नहीं था। संभवत उस दिन बड़ी मात्रा में मोबाइल मिल सकते थे। निरीक्षण से रोके जाने के पीछे मिलीभगत भी हो सकती है।
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