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अजमेर में दो नए वेटलैंड विकसित करने की योजना

सुप्रीम कोर्ट में कलक्टर ने दिया शपथ पत्र -आनासागर के वेटलैंड मामले में कल शीर्ष अदालत में सुनवाई अजमेर/ नई दिल्ली. आनासागर के मामले में एनजीटी के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट में हो रही सुनवाई को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। प्रकरण में सात अप्रेल को सुनवाई के दो दिन पहले ही अजमेर […]

सुप्रीम कोर्ट में कलक्टर ने दिया शपथ पत्र
-आनासागर के वेटलैंड मामले में कल शीर्ष अदालत में सुनवाई
अजमेर/ नई दिल्ली. आनासागर के मामले में एनजीटी के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट में हो रही सुनवाई को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। प्रकरण में सात अप्रेल को सुनवाई के दो दिन पहले ही अजमेर प्रशासन की ओर से जिला कलक्टर ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र प्रस्तुत किया है। इसमें पर्यावरणीय संरक्षण के उद्देश्यों को केंद्र में रखते हुए दो प्रमुख वेटलैंड (आर्द्रभूमि) परियोजनाओं का उल्लेख किया है। यह शपथ पत्र राज्य बनाम अशोक मलिक व अन्य याचिका में प्रस्तुत किया गया है।

शपथ पत्र के प्रमुख बिंदुफॉयसागर झील क्षेत्र:
 10 हेक्टेयर का वेटलैंड विकसित करने का प्रस्ताव है। वर्तमान में इस क्षेत्र में लगभग 2 हेक्टेयर का प्राकृतिक वेटलैंड मौजूद है, जिसे विस्तारित कर 10 हेक्टेयर तक किया जाएगा। एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट व तकनीकी सर्वेक्षणों के आधार पर तैयार किया जाएगा।
तबाजी ग्राम : 19 हेक्टेयर का नया वेटलैंड प्रस्तावित है। सरकार की आर्द्रभूमि संरक्षण एवं जैव विविधता नीति के तहत यह प्रस्ताव तैयार किया गया है।
सेवन वंडर्स और फूड कोर्ट के विरुद्ध कार्रवाई
शपथ पत्र में सेवन वंडर्स पार्क और फूड कोर्ट हटाने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई है। फूड कोर्ट को ध्वस्त कर दिया गया है। यहां ग्रीन बेल्ट स्थापित की जा रही है।
जनहित में गांधी स्मृति उद्यान एवं आजाद पार्क
गांधी स्मृति उद्यान और आजाद पार्क में जो निर्माण किए गए हैं वे पूरी तरह जनहित में थे। गांधी स्मृति उद्यान आनासागर से 1.5 किमी दूर है। इसे वेटलैंड में एनजीटी ने शामिल नहीं किया है। इसमें महात्मा गांधी के जीवन, दर्शन और बलिदानों की स्मृति में स्थायी संरचनाएं निर्मित की गई हैं, जिससे भावी पीढ़ियों को प्रेरणा मिल सके। यदि न्यायालय को निर्माणों से पर्यावरण को कोई क्षति पहुंची है तो सरकार इन्हें हटाने के लिए तैयार है।
आदेशों के शीघ्र अनुपालन का आश्वासन
सरकार कोर्ट के सभी आदेशों का पूरी निष्ठा के साथ अनुपालन करेगी। अनजाने में कोई त्रुटि हुई हो तो सरकार क्षमाप्रार्थी है और भविष्य में ऐसी कोई गलती न हो इसका ध्यान रखा जाएगा। किसी भी निर्देश की जानबूझ कर अवज्ञा नहीं की गई है। किसी भी चूक के लिए न्यायालय उचित निर्देश दे सकता है।


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